रविवार, 8 अगस्त 2010

जनगणना का विरोध....

                                      इस समय पूरे भारत में जनगणना 2011 का कार्य सामान्य रूप से चल रहा है. परन्तु पिछले दिनों असम के  ब्रह्मपुत्र सीमा क्षेत्र में जनगणना का विरोध किया गया. यह विरोध आल मुस्लिम स्टुडेंट यूनियन और अन्य बंगला देशी समर्थक लोगों ने किया.बंगलादेशी घुश्पैठ को संरक्षण प्रदान करने वाले सैकड़ो मुस्लिमों ने यह तर्क देकर गणना का विरोध किया कि असम के लिए गणना में विशेष प्रावधान होना चाहिए.लेकिन असम के स्थानीय लोगों का ऐसा कोई मांग नहीं है. जनगणना का विरोध कर रहे लोगों का का कहना है कि 1951 नहीं 1971 से जो लोग असम में है उन सबको यहाँ का मूल निवासी माना जाय. यदि सरकार ऐसा मान भी ले तो यह तय कौन करेगा कि 1971 तक कौन-कौन यहाँ आ चुका था.यानि कोई और नया मांग किया जायेगा.
ज्ञात हो कि एक सरकारी सर्वेक्षण के अनुसार पुरे भारत में पिछले दस वर्षों में सबसे ज्यादा जनसँख्या वृद्धि असम का है.लेकिन वास्तविकता ये है कि यहाँ के जन्म दर में गिरावट आई है.मतलब ये कि बिना जन्म के जनसँख्या में वृद्धि हो रही है.स्पष्ट है कि सबसे ज्यादा बंगलादेशी घुश्पैठ असम में ही हुआ है.जनगणना में इन सभी बातों का खुलासा न हो इसीलिए जनगणना का ही विरोध किया जा रहा है.
पिछले सप्ताह सैकड़ो बंगलादेशी समर्थक असम के बरपेटा जिला के डी.सी. कार्यालय पर हमला कर दिया.परन्तु मूल असमिया लोगों ने इसका जमकर विरोध किया है.आपसी झरप में कई दंगाई मारे गए है.
मामला विचारनिए है कि अपने ही देश में अब अपने संविधान और देश कि एकता-अखंडता का मजाक बन रहा है केंद्र सरकार के लिए यह कोई खास समस्या नहीं लगता और न ही देश के मिडिया का ही इस पर कोई ध्यान है.

1 टिप्पणी:

  1. कानून को अपना काम करना चाहिये और मूल निवासियों को सुरक्षा के साथ-साथ गैर-कानूनी आव्रजकों के साथ न्यायोचित कार्रवाई करनी चाहिये।

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